गणेश जोशी के आय से अधिक संपत्ति मामले पर सियासत तेज, हाईकोर्ट के आदेश को लेकर आमने-सामने आए मंत्री और याचिकाकर्ता

मंत्री बोले- हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा- आदेश अभी औपचारिक रूप से प्रोनाउंस नहीं हुआ

देहरादून। उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। मामले में हाईकोर्ट के आदेश को लेकर मंत्री गणेश जोशी और याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

गणेश जोशी ने कहा कि उन्होंने इस मामले को लेकर अभी तक कोई बयान नहीं दिया था। उन्होंने हाईकोर्ट का आभार जताते हुए दावा किया कि अदालत ने मामले से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है। मंत्री के मुताबिक, याचिका दो दिन पहले खारिज हुई थी और आदेश की प्रति उन्हें आज प्राप्त हुई है।

गणेश जोशी ने दावा किया कि उनके खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता की ओर से पहले इस्तेमाल किए गए उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर याचिका दाखिल की गई थी। उनका कहना है कि याचिका में संबंधित व्यक्ति का एफिडेविट भी नहीं था। मंत्री ने कहा कि इसी आधार पर यह याचिका भी खारिज हो जाएगी।

आदेश की कॉपी को लेकर याचिकाकर्ता पक्ष ने उठाए सवाल

वहीं, आय से अधिक संपत्ति मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता और आरटीआई कार्यकर्ता विकेश सिंह नेगी ने मंत्री के दावे पर सवाल उठाए हैं। नेगी के अनुसार, उनकी जानकारी में मामले का फैसला अभी रिजर्व है और उसे अदालत की ओर से औपचारिक रूप से प्रोनाउंस नहीं किया गया है।

विकेश सिंह नेगी ने सवाल उठाया कि यदि अदालत का आदेश अभी औपचारिक रूप से सुनाया नहीं गया है, तो उसकी प्रति मंत्री गणेश जोशी तक कैसे पहुंची।

याचिकाकर्ता पक्ष का दावा है कि अभी तक न तो सरकारी वकील को अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त हुई है और न ही याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को आदेश की कॉपी उपलब्ध कराई गई है। ऐसे में मंत्री के पास आदेश की प्रति पहुंचने को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

नेगी ने कहा कि न्यायपालिका पर आम जनता का भरोसा है और जब किसी व्यक्ति को अन्य स्तरों पर न्याय नहीं मिलता, तो वह न्यायालय की ओर उम्मीद से देखता है। ऐसे में किसी आदेश के औपचारिक रूप से सार्वजनिक होने से पहले उसकी प्रति उपलब्ध होने की स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

अब औपचारिक आदेश का इंतजार

फिलहाल, इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। एक तरफ कृषि मंत्री गणेश जोशी हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए याचिका खारिज होने की बात कह रहे हैं, जबकि याचिकाकर्ता पक्ष आदेश के औपचारिक रूप से प्रोनाउंस होने और उसकी प्रति उपलब्ध होने को लेकर सवाल उठा रहा है।

अब इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के औपचारिक आदेश और उसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। इसके बाद ही यह साफ हो सकेगा कि अदालत ने मामले में क्या आदेश दिया है और उसकी प्रति किस प्रक्रिया के तहत उपलब्ध हुई।

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