मुर्गियों की सप्लाई या बीमारी का कारोबार? मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला

देहरादून:मुर्गियों की सप्लाई या बीमारी का कारोबार? मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला

सप्लाई से पहले ही मौत का खेल,निगम की कार्रवाई में मिलीं 65 मृत मुर्गियां

देहरादून:हरियाणा से मृत मुर्गियों को लेकर देहरादून पहुंचा ट्रक पकड़े जाने के मामले ने शहर में मांस की आपूर्ति और जनस्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम की जांच में ट्रक से 65 मृत मुर्गियां मिलने के बाद सामने आए इस मामले को लेकर सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी ने उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया। शिकायत में मृत एवं बीमार मुर्गियों की आपूर्ति को नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार से जोड़ते हुए व्यापक जांच की मांग की गई।

अखबार में प्रकाशित घटना के अनुसार,नगर निगम के पूर्व मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान मृत मुर्गियों से भरा ट्रक पकड़ा गया था। बताया गया कि ट्रक चालक मौके से निकल गया, जिसके बाद पुलिस ने उसे रोका। जांच के दौरान ट्रक में 65 मृत मुर्गियां मिलीं। नगर निगम की टीम ने मृत मुर्गियों को डिस्पोज कर दिया, जबकि पुलिस द्वारा चालक के खिलाफ चालान की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई।

सवाल सिर्फ 65 मुर्गियों का नहीं, सप्लाई व्यवस्था पर भी नजर जरूरी

मानवाधिकार आयोग में दी गई शिकायत में कहा गया कि यदि ट्रक समय रहते नहीं पकड़ा जाता तो मृत अथवा खराब हालत में मौजूद मुर्गियां मांस के रूप में बाजार, होटल और रेस्टोरेंट तक पहुंच सकती थीं। शिकायत में इसी आधार पर यह सवाल उठाया गया कि शहर में बाहर से आने वाले मुर्गों की स्वास्थ्य जांच और निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

शिकायत में यह भी मुद्दा उठाया गया कि देहरादून में अधिकृत स्लाटर हाउस की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और मुर्गों तथा अन्य पशुओं के लिए लागू नियमों के अनुसार आवश्यक जांच एवं निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इसके अलावा शिकायत में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की ओर से देहरादून आने वाले जीवित एवं फ्रोजन चिकन की नियमित स्वास्थ्य जांच व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई।

नगर निगम, पुलिस, खाद्य सुरक्षा और पशुपालन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले को केवल एक ट्रक में मिली मृत मुर्गियों तक सीमित न मानते हुए यह जांच कराने की मांग की कि क्या इससे पहले भी बीमार या मृत मुर्गियों का मांस देहरादून के बाजारों तक पहुंचा है।

साथ ही नगर निगम, पुलिस प्रशासन, खाद्य सुरक्षा विभाग और पशुपालन विभाग की भूमिका की जांच तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। शिकायत में नागरिकों के जीवन एवं स्वास्थ्य के अधिकार, खाद्य सुरक्षा से संबंधित कानूनों तथा पशु कल्याण से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है।

मानवाधिकार आयोग ने मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी को भेजी शिकायत

मामले में उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए इसे नगर निगम देहरादून के मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा है। आयोग के आदेश में संबंधित अधिकारी को प्रकरण में विधि एवं नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। 

अब निगाह इस बात पर है कि नगर निगम और संबंधित विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करते हैं और क्या मृत मुर्गियों की बरामदगी की इस घटना से आगे बढ़कर देहरादून में बाहर से आने वाले चिकन की स्वास्थ्य जांच, मांस की गुणवत्ता, आपूर्ति व्यवस्था और अधिकृत स्लाटर हाउस की स्थिति की भी व्यापक जांच होती है।

65 मृत मुर्गियों की बरामदगी ने भले ही एक ट्रक को रोक दिया हो, लेकिन इस घटना ने देहरादून में मांस की आपूर्ति और जनस्वास्थ्य निगरानी की पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।

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